Jan 15, 2024

वैसी पीड़ा मुझे देना दाता


वैसी पीड़ा मुझे देना दाता  


चाय में थोड़ा विलंब था । समय बिताने के लिए भरे पेट वाले आजकल अंत्याक्षरी खेलते हैं । सामान्य आदमी की तो दो जून की रोटी जुगाड़ने में ही सांस फूल जाती है । बेकारी में भी वह अंत्याक्षरी नहीं खेलता । भजन करता है कि अच्छे दिन आयें । यह बात और है कि दो आरजू में और दो इंतजार में कट जाते हैं । ऐसे ही भूखा ब्राह्मण भी ज्यादा भजन करता है । सो चाय के इंतजार में तोताराम ने गुनगुनाने लगा, जो कुछ इस तरह था- 

वैसी पीड़ा हमें देना दाता ------ । 

हमने कहा- तू कौनसा ईसा है जो सबके पाप अपने सिर लेता है । कमर और घुटनों में दर्द रहता है । पेंशन की रजाई इस ठंड में लगातार छोटी पड़ती जा रही है । अब कौनसी पीड़ा शेष है जिसके लिए गुहार लगा रहा है । 

बोला- जब दर्द-पीड़ा हद से गुजर जाएंगे तो अपने आप ही दवा बन जाएंगे । लोग पता नहीं क्यों आयुष्मान भारत, प्रधानमंत्री जनऔषधि योजना और मोहल्ला क्लीनिक के चक्कर में पड़े है । बढ़ने दे मर्ज को, अपने आप दवा हो जाएगा । गालिब क्या झूठ कहते हैं- दर्द का हद गुजर जाना है दवा होना । 

और फिर पीड़ा का अपना एक मज़ा है । इसी बहाने सही, चार लोग पूछने तोआते हैं । 

हमने कहा- कोई नहीं आता । तुझे पता होना चाहिए जब नवाब साहब की कुतिया बीमार पड़ी तो हजार लोग पूछने आए लेकिन जब नवाब साहब मरे तो जनाजे में चार जन भी नहीं जुटे । कितने लोग हैं जो आडवाणी जी को मंदिर उद्घाटन में न आने का निमंत्रण मिलने पर उनके घावों पर मरहम लगाने या उनके आँसू पोंछने गए ।   

वैसे पीड़ा तो पीड़ा होती है, ऐसी वैसी क्या ? फिर भी तू भगवान से 'वैसी' कैसी पीड़ा मांग रहा है ? 

बोला- वैसे तो इस गीत के तीन चरण है लेकिन 'मुखड़ा' सुन-

वैसी पीड़ा मुझे देना दाता 

जैसी धनखड़ औ' मोदी को दी है 

हमने कहा- तो तू धनखड़ और मोदी जी जैसी पीड़ा चाहता है । उन्हें क्या पीड़ा है ? धनखड़ जी का केवल भाजपा के एजेंडे के तहत बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को परेशान करने के अतिरिक्त देश की राजनीति में ऐसा कौन सा योगदान है जिसके लिए उन्हें उपराष्ट्रपति बनाया गया । राजाओं वाली ज़िंदगी जीते हैं। कोई जिम्मेदारी नहीं। सरकारी खर्चे पर तीर्थयात्रा करते फिरो । और मोदी जी को भी मन की बात करने, विदेश यात्रा करने, नेहरू जी को गाली देने और दिन में दस बार कपड़े बदलने के अलावा कौन सा काम है ? 

अगर धनखड़ जी के लिए लोकसभा की ऊंची कुर्सी पर बैठना और मोदी जी के लिए कपड़े बदलना ही पीड़ा है तो हमें तो इस पीड़ा से बहुत ईर्ष्या है । भगवान ऐसी पीड़ा सबको दे । 

बोला- तू यहाँ आडवाणी जी की तरह मजे से बरामदा निर्देशक मण्डल में बैठकर चाय पेलता रहता है । तुझे क्या पता अपमान की पीड़ा क्या होती है । वह भी अपना नहीं  जाट जाति का, लोकसभा अध्यक्ष के पद का अपमान !कैसे धनखड़ साहब चार दिन में ही सूखकर मात्र एक सौ किलो के रह गए । ऊपर से लोग मिमिक्री और करने लगे । 

हमने कहा- अब धनखड़ साहब को और क्या चाहिए ? जो मोदी जी मणिपुर की महिलाओं पर वीभत्स अत्याचारों के बावजूद एक शब्द नहीं बोले, एक दिन के लिए मणिपुर नहीं गए, जो मोदी जी अपने घर की पहलवान बेटियों के यौन शोषण और सड़क पर घसीटे जाने पर भी मौन रहे, कुश्ती संघ के अध्यक्ष को बचाते रहे वे मोदी जी धनखड़ साहब की पीड़ा से इतने द्रवित हो गए कि ट्वीट कर आँसू पोंछने लगे । इससे ही कल्पना की जा सकती है कि धनखड़ साहब की पीड़ा कितनी दारुण और राष्ट्रीय महत्व की है । 

ठीक भी है घायल की गति गति घायल जाने । मोदी जी को भी ओ बी सी होने के कारण पिछले बीस वर्षों में जाने कितना अपमान सहना पड़ा है ?  सुना है गालियां खा खाकर पोषण प्राप्त करते रहे हैं ।  

बोला- इसीलिए मैं धनखड़ साहब और मोदी जी जैसी पीड़ा चाहता हूँ जिससे मेरा वजन भी एक सौ नहीं तो कम से कम पचास किलो तो हो जाए और मोदी जी की तरह चेहरे से नूर टपकने लगे । 

हमने पूछा- तोताराम, धनखड़ साहब की इस पीड़ादायक दशा की अब क्या दिशा होगी ? 

बोला- यदि मोदी जी को ऐसी पीड़ाओं का पिछले दस वर्षों की तरह पुरस्कार मिलता रहा तो वे फिर प्रधानमंत्री होंगे और धनखड़ साहब की दिशा उपराष्ट्रपति भवन से राष्ट्रपति भवन की तरफ होगी ।  


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(c) सर्वाधिकार सुरक्षित - रमेश जोशी । प्रकाशित या प्रकाशनाधीन । Ramesh Joshi. All rights reserved. All material is either published or under publication. Jhootha Sach

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